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जीव जगत का वर्गीकरण आशीष सर  का नोट्स ⇒      ⇩

जीव जगत का वर्गीकरण ( Classification of The living world ) या जीवों का वर्गीकरण जानने से पहले जीव विज्ञान ( Biology ) व जीव क्या है? इसे जानना जरूरी है। 


  • समस्त संसार में जितने भी प्राणी, वस्तु और पदार्थ जिनमें जीवन पाया जाता है, उसे जीव कहते हैं। जीवों का अध्ययन ही जीव विज्ञान ( Biology ) कहलाता है। Biology ग्रीक भाषा के Bios अर्थात जीव , Logos अर्थात अध्ययन से बना है। Biology शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1802 ई. में लैमार्क व ट्रेविरेनस ने किया परन्तु अरस्तु ने जन्तु और पौधों के जीवन के विषय में विचार व्यक्त किया था इसलिए अरस्तु को जीव विज्ञान का जनक ( Father of Biology ) कहा जाता है।
  • जीव जगत का वर्गीकरण : जीवों का वर्गीकरण करना इसलिए आवश्यक है ताकि उस जीव के बारे मे आसानी से अध्ययन किया जा सकता है। 


  • अरस्तु ने समस्त जीव जगत को लाल रक्त कणिकाओं ( RBC ) के आधार पर दो भागों/जगत में विभाजित किया था, जन्तु जगत और वनस्पति जगत । आधुनिक वर्गीकरण की नींव कैरोलस लिनियस ने रखी इसलिए कैरोलस लीनियस को आधुनिक वर्गीकरण का पित्ता ( Father of Mordern Taxonomy ) कहते है  लिनियस ने  दो भागों में विभाजित किया है जन्तु और पादप जगत।  इसी प्रकार कई वैज्ञानिक आए जिन्होंने समस्त जीवों को तीन, चार और पाँच जगत में विभाजित किया ।


  • पाँच जगत प्रणाली : 1969 ई. में समस्त जीवों को पाँच जगत - मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी तथा एनिमेलिया  में आर. एच. विटेकर ने बांटा ।


1.) मोनेरा ( Monera ) :
  •  जगत के जीवों में संगठित केन्द्रक या कोशिकांग का अभाव होता है। जैसे - जीवाणु, नील-हरित, शैवाल, माइकोप्लाज़्मा 

2.) प्रोटिस्टा ( Protista ) :
  • इसमें एक कोशिकीय यूकैरियोटिक जीव रखे गये है। जैसे -वेक कोशिकीय शैवाल, प्रोटोजोआ, डायटम आदि 

3.) कवक ( Fungi ) :
  •  कवक में विषमपोषी, यूकैरियोटिक जीव है, इनकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है, इनका शरीर कवक तंतुओं का बना होता है। जैसे - यीस्ट, मशरुम, पेनिसिलियम  

4.) पादप जगत ( Plantae ) :
  •  पादप में सेल्यूलोज की कोशिका भित्ति युक्त बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक जीव रखे गए हैं।  ये प्रकाश संश्लेषद के लिए क्लोरोफिल का प्रयोग करते हैं। इस जगत को थेलोफाइटा, ब्रायोफाइटा,टेरीडोफाइटा, अनावृत बीजी ( Gymenosperms ), आवृत बीजी ( Angiosperm ) में बांटा है।

5.) जंतु जगत ( Animalia ) :
  •  इसमें यूकैरियोटिक, बहु कोशिकीय और विषमपोषी जीवो को रखा गया है। इनकी कोशिका में कोशिका भित्ति का अभाव होता है, इसे अकशेरुकी ( Invertebrata ) तथा कशेरुकी ( Vertebrata ) में बांटा गया है।
  • NOTE : जीवो के सभी पद या क्रम मिलकर टेक्सोनोमी पदानुक्रम बनाते है।
Kingdom>phylum>class>order>family>genus>species  ( in English )
किंगडम > फाइलम > वर्ग > गण > कुटुंब > वंश > जाति  ( हिंदी में )


जीवों के नामकरण की द्विनाम पद्ति ( Nomenclature of organisms ) :
  •  द्विनाम पद्धति कैरोलस लीनियस ने 1753 ईस्वी में दी थी, इस पद्ति के अनुसार ही प्रत्येक जीव  नाम लेटिन भाषा के दो शब्दो से मिलकर बनता है। पहला शब्द वंश नाम और दूसरा शब्द जाति नाम होता है, जैसे - मानव का वैज्ञानिक नाम होमो सेपियन्स होता है इसमें होमो वंश का नाम है और इसे चित्र देखकर समझ सकते हैं। 
जीव जगत का वर्गीकरण | Classification of the living world | Exam Study Book
जीवों का नामकरण

जीवधारी के वैज्ञानिक नाम ( Scientific names of organisms )
  1. frog : Rana tigrina ( राना टिगरीना )
  2. Human : Homo sapiens ( होमो सैपियन्स )
  3. Cow : Bos indicus ( बोस इंडिकस )
  4. Cat : Felis domestica ( फेलिस डोमेस्टिका )
  5. Dog : Canins familiaris ( केनिस फैमिलियरस )
  6. Housefly : Musca domestica ( मसका डोमेस्टिका )
  7. Peacock : Pavo cristatus ( पैवो क्रिसटेटस )
  8. Neem : Azadirachta indica ( अजाडिरका इंडिका )
  9. Carrot : Doucus carota ( डोकस कैरोटा )
  10. Pea : Pisum sativum ( पाइसम सटाइवम )
  11. Wheat : Triticum Aestivum ( ट्रिटीकम एइस्टिवम )
  12. Potato : Solanum tuberosum ( सौलेनम टूबररोसम )
  13. Mango : Mangifera indica ( मैंजिफेरा इंडिका )
  14. Onion : Allium cepa ( एलियम सैपा )




     Written by  Ashish tiwari sir.  

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