- विज्ञान की प्रमुख शाखाएँ एवं उनके अध्ययन विषय

- 1. अरबोरीकल्चर — वृक्ष उत्पादन संबंधी विज्ञान
- 2. आरकोलाजी — पुरातत्व सम्बन्धित विज्ञान की शाखा है
- 3. आर्थोपीडिक्स — अस्थि उपचार का अध्ययन
- 4. इकोलोजी — जीव व पर्यावरण के बीच पारस्परिक सम्बन्धोँ का अध्ययन
- 5. इथेनोलोजी — विभिन्न संस्कृतियों का तुलनात्मक अध्ययन
- 6. इथेनोग्राफी — किसी विशिष्ट संस्कृति का अध्ययन
- 7. इथोलोजी — प्राणियोँ के व्यवहार का अध्ययन
- 8. इक्थियोलोजी — मत्स्य की संरचना , कार्यिकी इत्यादि का अध्ययन
- 9. एंटोमोलोजी — कीटों का वैज्ञानिक अध्ययन
- 10. एंथोलोजी — फूलो का अध्ययन
- 11. एग्रोस्टोलॉजी — घास का अध्ययन
- 12. एकोस्टिक्स — यह ध्वनि से सम्बन्धित विज्ञान है
- 13. एपीकल्चर— मधुमक्खियोँ के पालन का अध्ययन
- 14. एपीग्राफी— शिलालेख सम्बन्धी ज्ञान का अध्ययन
- 15. एरोनोटिक्स — वायुयान सम्बन्धी विज्ञान की शाखा है
- 16. एस्ट्रोनॉमी— खगोलीय पिण्डों का अध्ययन
- 17. एस्ट्रोलॉजी — मानव पर ग्रह – नक्षत्र के प्रभाव का अध्ययन
- 18. ऐक्रोबेटिक्स— व्यायाम सम्बन्धी विज्ञान की शाखा है
- 19. ऐस्ट्रोनोटिक्स— यह अन्तरिक्ष यानो से सम्बन्धित विज्ञान है
- 20. ऑरनीथोलॉजी— पक्षियों का अध्ययन
- 21. ऑस्टियोलॉजी— हड्डियों का अध्ययन
- 22. ओडोण्टोलोजी— दाँत व मसूङोँ का अध्ययन
- 23. ओरोलॉजी — पर्वतों का अध्ययन
- 24. ओप्टिक्स — प्रकाश के प्रकार व गुणोँ का अध्ययन
- 25. ओलिवोकल्चर— जैतून की कृषि का अध्ययन
- 26. ओलेरीकल्चर— सब्जियों की व्यापारिक कृषि
- 27. औनीरोलॉजी — स्वप्नों का अध्ययन
- 28. कार्डियोलोजी — ह्रदय की रचना तथा रूधिर कार्यविधि का अध्ययन
- 29. कीमोथेरैपी— रासायनिक यौगिको से कैँसर का उपचार किया जाता है
- 30. कैलोलॉजी — मनुष्य के सौन्दर्य का अध्ययन
- 31. कोस्मोलॉजी— ब्रहाण्ड का अध्ययन
- 32. कोस्मोलोजी— ब्रह्माण्ड के जन्म , विकास और विलोपन का अध्ययन किया जाता है
- 33. क्रायोजेनिक्स— निम्न ताप पर वस्तुओँ के गुणोँ और अन्य परिघटनाओँ का अध्ययन
- 34. जेनेटिक्स — जीवोँ के आनुवंशिक लक्षणोँ के पीढी दर पीढी हस्तांतरण की प्रकिया का अध्ययन
- 35. जेरेंटोलॉजी — बृद्ध ब्यक्तियों का अध्ययन
- 36. ट्राइबोलोजी— घर्षण एवं स्नेहक का अध्ययन
- 37. न्यूमिस्मेटिक्स — पुराने सिक्कों का अध्य्यन
- 38. न्यूमेरोलोजी — अंकोँ का अध्ययन
- 39. न्यूरोलॉजी — तंत्रिकाओं ( नाड़ी ) का अध्ययन
- 40. न्यूरोलोजी — तंत्रिका तंत्र का अध्ययन
- 41. पीसीकल्चर— मछलियों का व्यापारिक उत्पादन का अध्ययन
- 42. पेडागोजी — अध्यापन कला का अध्ययन
- 43. पैरासिटोलॉजी — परजीवी जीवो काअध्ययन
- 44. पैडोलोजी — मिट्टी का अध्ययन
- 45. पैथोलोजी — रोगोँ की प्रक्रति के कारण, उपचार आदि का अध्ययन
- 46. पैलिनोलॉजी — विभिन प्रकार के परागकणों का अध्ययन
- 47. पैरालोजी— स्पंजोँ का अध्ययन
- 48. पैलियोण्टोलोजी(पैलियोबॉयोलोजि) — जीवाश्मोँ का अध्ययन
- 49. पोमोलॉजी — फलों का अध्ययन
- 50. फ्रैनोलाजी— मष्तिष्क के विभिन्न भागो के क्रियाशीलता व् विक्षिप्तता का अध्ययन
- 51. फाइकोलोजी — शैवालोँ का अध्ययन
- 52. फिजियोग्राफी — प्राक्रतिक भूगोल का अध्ययन
- 53. फिलालोजी — भाषा की संरचना व् विकास व् इतिहास अध्ययन
- 54. फ्लोरीकल्चर — फूलों की कृषि
- 55. बायोकेमिस्ट्री — जीव शरीर की रासायनिक क्रियाओँ के अध्ययन सम्बन्धी विज्ञान की शाखा है
- 56. माइक्रोबायोलोजी — सूक्ष्म जीवों का अध्ययन
- 57. माइक्रोलॉजी — फफूंद एवं संबंधित विषयों का अध्ययन
- 58. मारफोलॉजी — जीव एवं भौतिक जगत् की आकारिकी का अध्ययन
- 59. मिनेरालॉजी — खनिजों का अध्ययन
- 60. मेटेरोलॉजी — वातावरण एवं संबंधित विषयों का अध्ययन
- 61. मेमोग्राफी — स्त्रियोँ के स्तनोँ की जाँच करने वाली चिकित्सा विज्ञान की शाखा है
- 62. मेमोलोजी — स्तनधारी जन्तुओँ का अध्ययन
- 63. मैरिकल्चर — समुद्री जीवों का उत्पादन
- 64. मोर्फोलोजी — पौधोँ की बाह्य संरचना का अध्ययन
- 65. मोलीक्यूलर — बायोलोजी आणविक स्तर पर जीवोँ की संरचना व कार्योँ का अध्ययन
- 66. लिथोलॉजी — चट्टानों एवं पत्थरो से संबंधित विषयों का अध्ययन
- 67. लेक्सिकोग्राफी — शब्द कोष का संकलन
- 68. विटीकल्चर — अंगूर की खेती का अध्ययन
- 69. साइकोलोजी — मनोविज्ञान का अध्ययन
- 70. साइटोजेनेटिक्स — जीव कोशिका और उसकी आनुवंशिक विशेषताओँ का अध्ययन
जीव जगत का वर्गीकरण आशीष सर का नोट्स ⇒ ⇩ जीव जगत का वर्गीकरण ( Classification of The living world ) या जीवों का वर्गीकरण जानने से पहले जीव विज्ञान ( Biology ) व जीव क्या है? इसे जानना जरूरी है। समस्त संसार में जितने भी प्राणी, वस्तु और पदार्थ जिनमें जीवन पाया जाता है, उसे जीव कहते हैं। जीवों का अध्ययन ही जीव विज्ञान ( Biology ) कहलाता है। Biology ग्रीक भाषा के Bios अर्थात जीव , Logos अर्थात अध्ययन से बना है। Biology शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1802 ई. में लैमार्क व ट्रेविरेनस ने किया परन्तु अरस्तु ने जन्तु और पौधों के जीवन के विषय में विचार व्यक्त किया था इसलिए अरस्तु को जीव विज्ञान का जनक ( Father of Biology ) कहा जाता है। जीव जगत का वर्गीकरण : जीवों का वर्गीकरण करना इसलिए आवश्यक है ताकि उस जीव के बारे मे आसानी से अध्ययन किया जा सकता है। अरस्तु ने समस्त जीव जगत को लाल रक्त कणिकाओं ( RBC ) के आधार पर दो भागों/जगत में विभाजित किया था, जन्तु जगत और वनस्पति जगत । आधुनिक वर्गीकरण की नींव कैरोलस लिनियस ने रखी इ...
Waah tiwari ji thx a lot brother
ReplyDeleteU WELCOME
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